श्रीमाली ब्राह्मण व वैश्य समाज का इतिहास व कुलदेवियाँ Gotra wise Kuldevi List of Shrimali Community

Shrimali Brahmin and Shrimali Vanik Samaj Kuldevi List| History of Shrimali Brahmin and Shrimali Vanik | पण्डित ज्वालाप्रसाद मिश्र ने पुराण...

Shrimali Brahmin and Shrimali Vanik Samaj Kuldevi List| History of Shrimali Brahmin and Shrimali Vanik |
पण्डित ज्वालाप्रसाद मिश्र ने पुराणों, ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड आदि ग्रंथों के सन्दर्भ से अपनी पुस्तक ‘जातिभास्कर’ में श्रीमाली समाज की उत्पत्ति का वर्णन किया है। स्कंद पुराण के कल्याण खंड में लिखा है कि एक समय गौतम ऋषि ने हिमालय के समीप भृगुतुंग क्षेत्र में शिवजी की आराधना की। शिवजी ने प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा तो गौतम ऋषि बोले , ऐसा स्थान बताइये जहाँ निर्भय होकर तपस्या करूँ। तब शिव जी ने कहा सौगन्धिक पर्वत के उत्तर अर्बुदारण्य से वायव्य कोण की ओर जाओ, वहां त्र्यंबक सरोवर के समीप आश्रम बनाओ, वह विश्वप्रसिद्ध तीर्थ होगा। तब गौतम जी ने वहां जाकर कठिन तपस्या की। तब ब्रह्मादिक सब देवताओं ने आकर वर दिया कि आज से यह गौतम आश्रम नाम से विख्यात होगा और सब देवता यहां निवास करेंगे यह कहकर देवता चले गए। आश्रम का नाम श्रीमाल क्षेत्र हुआ। इस नाम का कारण यह है कि भृगु ऋषि की अद्वैतरूपिणी श्री नाम की एक कन्या थी। नारद जी ने विष्णु भगवान के निमित्त वह कन्या देने को कहा। भृगु ऋषि सम्मत हुए तब भगवान विष्णु ने नारद के वचन से माघ शुक्ल एकादशी को उसका पानीग्रहण किया। तब नारद जी बोले, भगवन् ! अब इस वधू को त्र्यम्बक सरोवर में स्नान कराया जाए तब यह अपने स्वरूप को पहचानेगी। स्नान करते ही वह कन्या लक्ष्मी स्वरुप को प्राप्त हो गई। सब देवता विमानों में बैठ स्तुति करने लगे। तब लक्ष्मी ने देवताओं से कहा जैसा यहां का आकाश विमानों सुशोभित है, वैसी यहां की पृथ्वी घरों से शोभित हो जाए। अनेक गोत्र के ऋषि मुनि यहां आवें। मैं उनको यह भूमि दान करुंगी, अपने अंश से मैं यहां निवास करूंगी। देवताओं ने तथास्तु कहा। विश्वकर्मा ने वहां सुंदर नगर बनाया, तब ब्रह्मा जी बोले – श्री के उद्देश्य से देवताओं की विभाग माला से यह पृथ्वी व्याप्त हुई है। इस कारण श्रीमाल नाम से यह नगर विख्यात होगा।
तब भगवान् विष्णु के दूत अनेक ऋषि-मुनियों को बुला कर लाए। कौशिकी, गंगा तटवासी गयाशीर्ष, कालिंजर, महेन्द्राचल, मलयाचल, गोदावरी, प्रभास, उज्जयंत, गोमती, नंदिवर्द्धन,सौगन्धिक पर्वत, पुष्कर, प्रयाग, कुरुक्षेत्र, हेमकूटआदि अनेक तीर्थों से 45 हजार ब्राह्मण आये। उनको बड़े सत्कार के साथ घरों में सब सामग्री रखकर लक्षदान करने लगी, और सबसे पहले गौतम की पूजा की इच्छा की। इसका सिंध देशवासी ब्राह्मणों ने विरोध किया, तब आंगिरस ब्राह्मणों ने कहा तुम महातपस्वी गौतम का विरोध करते हो इस कारण तुमसे वेद पृथक हो जाएगा। वह यह सुन कर चले गए वे सिंधुपुष्करणा ब्राह्मण कहलाते हैं।
जब लक्ष्मी ने कहा पृथ्वी ब्राह्मणों को दान दी और साथ में चार लाख गायें दी। वरुण देवता ने उस समय देवी लक्ष्मी को 1008 स्वर्ण के कमलों की माला पहनाई। माला के पत्रों में स्त्री-पुरुषों के प्रतिबिंब दिखने लगे। और वह प्रतिबिंब के स्त्री-पुरुष भगवती की इच्छा से कमलों से बाहर प्रकट हो गए।उन्होंने लक्ष्मी से पूछा कि हमारा नाम और कर्म क्या है ? भगवती बोली, हे प्रतिबिम्बोत्पन्न ब्राह्मणों ! तुम नित्य सामगान किया करो, और श्रीमाल क्षेत्र में कलाद नाम वाले (जिनको त्रागड सोनी कहते हैं) होंगे; और ब्राम्हणों की स्त्रियों के आभूषण बनाना तुम्हारा काम होगा।
इस प्रकार यह प्रतिबिंब से उत्पन्न ने 8064 कलाद त्रागड ब्राह्मण हुए। उनमें से वैश्यधर्मी, बसोनी हुए, यह पठानी सूरती अहमदाबादी खम्बाती ऐसे अनेक भेद वाले हुए। यह जिन ब्राह्मणों के पास रहे उन्हीं के नाम से कलाद त्रागड ब्राह्मणों का गोत्र चला इस प्रकार यह त्रागड ब्राह्मण भी अध्ययन करते और भूषण बनाते। फिर ब्राह्मणों के धन आदि की रक्षा के लिए विष्णु ने अपनी जंघा से गूलर, दण्डधारी दो वैश्य उत्पन्न किए और उनको ब्राह्मणों की सेवा में लगाया। गोपालन व्यापार उनका कार्य हुआ और 90 हजार वैश्यों ने वहां निवास किया और उनके स्वामी ब्राह्मणों के गोत्र से उन वैश्यों के गोत्र हुए। उस नगर के पूर्ववासी प्राग्वाट पोरवाल कहलाये, दक्षिण के पटोलिया, पश्चिम के श्रीमाली और उत्तर के उर्वला कहलाए।

श्रीमाली ब्राह्मण :


एक बार भगवान् विष्णु और भगवती श्री (लक्ष्मी) ने त्रयम्बक सरोवर में स्नान किया। भगवती श्री ने भूमिदान करने की इच्छा से देवताओं को कहा –

श्रीरुवाच-
            तदिदं श्रूयतां देवा मम मानसिकं मतम् |
            अत्रर्षयो महात्मानो नानागोत्रास्तपस्विनः ||
            सह पत्नीभिरायान्तु पुत्रैः शिष्यैः समावृताः |
            इमां भूमिं प्रदास्यामि ब्राह्मणेभ्यः समाहिताम् ||
            अत्रांशेन ममैवास्तु निवासः शाश्वतीः समाः | 

विष्णुरुवाच-
            त्वं देवि परमा शक्तिः यदिच्छसि तथा करु |
            पुरं निमेषमात्रेण विश्वकर्मा विनिर्ममे ||
            ततः श्रीमालनाम्ना तु लोके ख्यातमिदं पुरम् |
 पंचोना खलु पंचाशत्सह्स्त्राणि द्विजन्मनाम् |
            अष्टादश तथैवासन् गोत्राणां तत्र भूपते |
            ततः श्रीमालिनो विप्रा प्रवत्स्यन्ते कलौ युगे |(ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड) 
           लक्ष्मीजी ने कहा- हे! देवताओं मेरे मन की भावना यह है कि यहाँ अनेक गोत्रों के तपस्वी ऋषि-महात्मा अपने परिवार और शिष्यगणों के साथ आकर स्थायी रूप से बसे। मैं ब्राह्मणों को इस त्रयम्बक सरोवर क्षेत्र की भूमि का दान करुँगी। यह अनन्तकाल तक मेरे अंश रूप में निवास रहेगा।
भगवान् विष्णु बोले, हे देवी ! आप परमशक्ति हैं। आपकी जैसी अभिलाषा है वैसा ही करिए। तब लक्ष्मीजी के इच्छानुसार विश्वकर्मा ने, भव्य नगर का निर्माण किया जो संसार में “श्रीमाल” नाम से प्रसिद्ध हुआ। उस नगर में पेंतालीस हजार ब्राह्मण आकर बसे। उन सबके अठारह गोत्र हुए। वे सब श्रीमाली ब्राह्मण कहलाए। कलयुग में उनका सर्वत्र प्रसार प्रवास होगा। वर्तमान में चौदह गोत्र हैं, किन्तु मूल रूप में अठारह गोत्रों का वर्णन है।

श्रीमाली ब्राह्मण समाज के गोत्र व कुलदेवियाँ :

Gotra wise Kuldevi List of Shrimali Samaj : श्रीमाली समाज की गोत्र के अनुसार कुलदेवियों का विवरण इस प्रकार है –

Kuldevi List of Shrimali Samaj श्रीमाली समाज के गोत्र एवं कुलदेवियां 

सं.कुलदेवी ऋषिगोत्र (Rishi Gotra of Shrimali Samaj)
1.
कमलेश्वरी माता (Kamaleshwari Mata)कौशिक
2.
क्षेमंकरी माता (Kshemkari Mata)शाण्डिल्य
3.
खरानना माता (Kharanana Mata)मौदगल
4.
चामुण्डा सुन्धा माता (Chamunda/ Sundha)लौडवान
5.
दत्तचण्डीमाता (Datta Chandi Mata)हरितस
6.
नागिणी माता (Nagini Mata)औपमन्यव
7.
निम्बजा माता (Nimbaja Mata)गौतम
8.
बगस्थली माता (Bagasthali Mata)कपिंजल
9.
 बन्धुक्षणी माता (Bandhukshani Mata)भारद्वाज
10.
बालगौरीमाता (Balgauri Mata)वत्सस
11.
महालक्ष्मीमाता (Mahalaxmi Mata)चान्द्रास
12.
योगेश्वरी माता (Yogeshwari Mata)काश्यप
13.
वटयक्षिणी माता (Vata Yakshini Mata)पाराशर
14.
वरुणामाता (Varuna Mata)सनकस

श्रीमाली वैश्य :

जब लक्ष्मीजी ने श्रीमालनगर का निर्माण कराके वहाँ श्रीमाली ब्राह्मणों तथा त्रागड सोनियों को बसा दिया तब व्यापार कर्म के लिए भगवान् विष्णु ने वैश्यों को उत्पन्न किया और श्रीमाल क्षेत्र में वाणिज्य पशुपालन तथा खेती करने का आदेश दिया –
                  ततो मनोगतं ज्ञात्वा देव्या देवो जनार्दनः |
                  उरु विलोकयामास सर्गकृत्ये कृतादरः ||
                  यज्ञोपवीतिनः सर्वे वणिज्योऽथ विनिर्ययुः |
                  ते प्रणम्य चतुर्बाहुमिदमूचुरतन्द्रिताः ||
अस्मानादिश गोविन्द कर्मकाण्डे यथोचिते |
                  तत् श्रुत्वा प्रणतान् विष्णुर्वनिजः प्राह तानिदं |
                  पाशुपाल्यं कृषि र्वार्ता वाणिज्यं चेति वः क्रियाः ||
                  प्राग्वाटादिशि पूर्वस्यां दक्षिणस्यां धनोत्कटाः |
                  तथा श्रीमालिनो याम्यांमूत्तरस्या मथो विशः ||
          वैश्यों के बिना श्रीमाल वासियों का जीवननिर्वाह कैसे होगा ? इस चिंता से चिन्तित लक्ष्मीजी का मनोभाव भगवान् विष्णु जान गए। उन्होंने सृष्टि रचना के प्रयोजन से अपनी जंघाओं पर दृष्टिपात किया। वहाँ यज्ञोपवीत धारी वैश्य प्रकट हो गए। उन्होंने भगवान् विष्णु को प्रणाम करके अपने लिए कर्तव्य कर्म की अभिलाषा प्रकट की। भगवान् विष्णु बोले, तुम वाणिज्य कृषि और पशुपालन का काम करो।
वे वैश्य श्रीमाल नगरी में बस गए। जो श्रीमाल शहर के पूर्विभाग में रहे वे पोरवाल कहलाए। दक्षिणी भाग में बसने वाले श्रीमाली और उत्तर वाले उवला कहलाए।

                    एवमेते स्वर्णकाराः श्रीमालिवणिजस्तथा |
                    प्राग्वडा गुर्जराश्चैव पट्टवासास्तथापरे ||
          इस प्रकार श्रीमाल क्षेत्र में सोनी, श्रीमाली वैश्य, पोरवाल, गूजर पटेल पटवा आदि वैश्य हुए।

श्रीमाली वैश्य कुलदेवी –

                     कृषिगोरक्ष्यवाणिज्य स्वर्णकार क्रियास्तथा |
                     तेषां व्याघ्रेश्वरी देवी योगक्षेमस्यकारिणी |
           वे सब खेती, पशुपालन, वाणिज्य और सुनारकर्म करने वाले वैश्य हुए। उनकी कुलदेवी व्याघ्रेश्वरी है।


नाम

10th,3,12th,3,12th result,1,अक्षरब्रह्मयोग ~ अध्याय आठ ~ AksharBrahmaYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 8,1,अग्रोहा महालक्ष्मी माता –,1,अम्बे जी की आरती,1,अर्जुनविषादयोग ~ भगवत गीता ~ अध्याय एक - Bhagwat Geeta Chapter 1,1,अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्,1,आज के इतिहास (History Today),365,आत्मसंयमयोग ~ अध्याय छः ~ AtmSanyamYog Bhagwat Geeta Chapter 6,1,आरती कुंज बिहारी की,1,आरती चालीसा,50,आरासुरी अम्बाजी की श्लोकमय कथा,1,आशापूरा माता की श्लोकमय कथा,1,इतिहास कुलदेवी कथा,1,ईसाई धर्म,1,ऑनलाइन इनकम,14,करणीमाता की श्लोकमय कथा व इतिहास,1,करियर,10,कर्मयोग~ भगवत गीता ~ अध्याय तीन - Karmyog Bhagwat Geeta Chapter 3,1,कर्मसंन्यासयोग ~ अध्याय पाँच ~ KarmSanyasYog Bhagwat,1,कहानियाँ,5,कानून,2,कीर्ति खरबंदा,1,कुल देवी कथा माहात्म्य,1,कुलदेवी,49,कुलदेवी कथा,11,कुलदेवीकथामाहात्म्य,11,कैलामाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य,1,क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग ~ अध्याय तेरह ~ Ksetra-Ksetrajnay Vibhag Yog ~ Bhagwat Geeta Chapter 13,1,खान-पान,231,गणेश पञ्चरत्नं,1,गीता,19,गुणत्रयविभागयोग ~ अध्याय चौदह ~ GunTrayVibhagYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 14,1,गुरुनानक गुरुजी के द्वारा हमे दी गयी शिक्षाएं,1,चुनाव,3,जगदीश जी की आरती,1,जीणमाता की श्लोकमय कथा व इतिहास,1,जीवन बीमा प्रश्नोत्तरी,2,जीवनी,2,ज्ञानकर्मसंन्यासयोग ~ अध्याय चार ~ GyanKarmSanyasYog Bhagwat Geeta Chapter 4,1,ज्ञानविज्ञानयोग ~ अध्याय सात ~ GnyanVignyanYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 7,1,झांवी कॉमिक्स,12,टेक ज्ञान,1,त्योहार,1,दधिमथी माता का इतिहास व कथा,1,देश,2,देश-विदेश,3,दैवासुरसम्पद्विभागयोग ~ अध्याय सोलह ~ DaiwaSurSampdwiBhagYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 16,1,धर्म,2,नौकरी,19,न्यूज़,2,पढ़ाई,5,पुरुषो के लिए,1,पुरुषोत्तमयोग ~ अध्याय पंद्रह ~ PurushottamYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 15,1,पूर्णिमा व्रत कथा,1,पौधे रोपण-खेतीबाड़ी,19,प्रश्नोत्तरी,11,फैशन,52,बच्चो के लिए,2,बच्चों के लिए,29,बागवानी,19,बिज़नस,1,बिजनेस फाइनेंस,21,बुद्ध धर्म,1,बैंक,1,बॉलीवुड,254,ब्लॉग,227,भक्तियोग ~ अध्याय बारह ~ BhaktiYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 12,1,भगवत गीता,19,भगवत भगवान की आरती,1,भजन कीर्तन,44,भारतीय लोकतंत्र,2,भैरव जी की आरती,1,मज़ाक,1,मुस्लिम धर्म,3,मोक्षसंन्यासयोग ~ अध्याय अट्ठारह ~ MokshSanyasYog~ Bhagwat Geeta Chapter 18,1,योग,1,राजविद्याराजगुह्ययोग ~ अध्याय नौ ~ RajVidyaRajGuhyaYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 9,1,रामायण,1,राशि उपाय,57,राशिफल 2017,1,लव लाइफ,3,लव स्टोरी,1,लिङ्गाष्टकम् स्तोत्रम्,1,लेखांकन,1,वास्तु शास्र,6,विडियो,1,विभूतियोग ~ अध्याय दस ~ VibhutiYog ~ Bhagwat Geeta Chapter 10,1,विश्वरूपदर्शनयोग ~ अध्याय ग्यारह ~ Vishwa Roop Darshan Yog ~ Bhagwat Geeta Chapter 11,1,वीडियो,4,वैज्ञानिक,1,व्यंजन रेसिपी,130,व्रत कथा,8,व्रत विधि व आरती,2,शाकम्भरी माता चालीसा,1,शिरडी साई बाबा चालीसा,1,शिरडी साई बाबा धूप आरती,1,शिव चालीसा,1,शिव जी की आरती,1,शीतला माता की अद्भुत कथा व इतिहास-कुलदेवीकथामाहात्म्य,1,शेयर बाजार,1,श्रद्धात्रयविभागयोग ~ अध्याय सत्रह ~ Shraddha Tray Vibhag Yog ~ Bhagwat Geeta Chapter 17,1,श्री अन्नपूर्णा चालीसा,1,श्री अन्नपूर्णा माता की आरती,1,श्री काली माता की आरती,1,श्री काली माता चालीसा,1,श्री कृष्ण चालीसा,1,श्री गंगा चालीसा,1,श्री गंगा माता आरती,1,श्री गणेश चालीसा,1,श्री गणेश जी की आरती,1,श्री गायत्री चालीसा,1,श्री गायत्री माता की आरती,1,श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती,1,श्री जीण चालीसा,1,श्री जीण माता की आरती,1,श्री दुर्गा चालीसा,1,श्री नवग्रह आरती,1,श्री नवग्रह चालीसा,1,श्री परशुराम चालीसा,1,श्री भैरव चालीसा,1,श्री मंगलवार व्रत कथा व्रत विधि व आरती,1,श्री रघुवर जी की आरती,1,श्री रविवार व्रत कथा,1,श्री राधाकृष्ण की आरती,1,श्री राम चालीसा,1,श्री रामचन्द्र जी की आरती,1,श्री लक्ष्मी माता की आरती,1,श्री लक्ष्मी माता चालीसा,1,श्री ललिता माता की आरती,1,श्री ललिता माता चालीसा,1,श्री विश्वकर्मा जी की आरती,1,श्री विश्वकर्मा जी चालीसा,1,श्री विष्णुशतनामस्तोत्रम्,1,श्री वीरभद्र चालीसा,1,श्री शनि देव चालीसा,1,श्री शनि देव जी की आरती,1,श्री सत्य नारायण व्रत कथा,1,श्री सन्तोषी माता की आरती,1,श्री सन्तोषी माता चालीसा,1,श्री सरस्वती चालीसा,1,श्री सरस्वती माता की आरती,1,श्री सोमवार व्रत कथा,1,श्री सोलह सोमवार व्रत कथा,1,श्रीदधिमथीमाता मंगल,1,श्रीराम रक्षा स्तोत्रम्,1,श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्‌,1,संकटनाशक गणेश स्तोत्र : प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्र विनायकम्,1,संस्कृत,1,सच्चियाय माता की श्लोकमय कथा,1,सन्तान सप्तमी व्रत कथा,1,समाचार,37,समाचार चैनल LIVE,6,सांख्ययोग ~ भगवत गीता ~ द्वितीय दो - Bhagwat Geeta Chapter 2,1,साई बाबा की आरती,1,सामान्य ज्ञान,14,सालासर बालाजी की आरती,1,सिख धर्म,4,सुन्धामाता की अद्भुत कथा व इतिहास,1,सोम प्रदोष व्रत कथा,1,स्तोत्र,7,हनुमान जी की आरती व चालीसा,1,हिंगलाजमाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य,1,हिन्दी सीखें,32,हिन्दू धर्म,69,हेल्थकेयर,10,हैल्थकेयर,363,Adjustment (समायोजन),21,Advance Tech (हिंदी में),5,age in banking,1,Armpits,1,Bank Reconciliation Statement (बैंक समाधान विवरण),11,banking for general class,1,Bhajan Kirtan,44,Bills of Exchange (विनिमय विपत्र),11,Business Studies (व्यवसाय),14,career,1,career development,1,Cash Book (रोकड़ बही),8,chaupai,11,Community wise Kuldevi,38,Company (कम्पनी),2,Depreciation (ह्रास),8,Diana Penty,1,Diana Penty bollywood,1,Diana Penty Desi Beuty,1,Diana Penty- desi daru,1,education,1,education in india,1,education standards,1,Entrepreneurship (उद्यमिता),26,Entrepreneurship (उद्यमिता),4,exam,1,exams.in.net,1,fail,1,Final Account (अंतिम लेखा लेखांकन),28,Finance (वित्त),2,general,1,Government Exam Practice Papers,2,GOVERNMENT EXAM PRACTICE PAPERS ANSWERS,1,govt jobs,1,indian god bhajans,44,Journal (रोजनामचा),16,Ketika Sharma Bollywood,1,Ledger (बही-खाता),11,Management (प्रबन्ध),15,Offers,1,padai,1,poor education,1,Practice Test of IRDA (ic33 & ic 38),2,Quran,1,Rakul preet,9,Rakul Preet Beautiful Pics,1,Rectification of Errors (अशुद्धियों के सुधार),4,Rhea Chakarborty,1,sexy rakul preet,1,student life,1,Top Bhajans of all time,44,Trial Balance (संतुलन परीक्षण),9,
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